गौरव बिहार

पहलेजाघाट दक्षिण वाहनी गंगा नदी में 2 दर्जन से ऊपर साधु संत कर रहे कल्पवास




सोनपुर--- सोनपुर प्रखंड के अंतर्गत के पहलेजाघाट धाम स्थित दक्षिण वाहनी गंगा नदी स्थित कार्तिक मास गंगा सेवन को लेकर 2 दर्जन से ऊपर साधु संत के साथ अन्य सर्ध्यलुओ ने कार्तिक मास शुरू होते ही यहां कल्पवास कर रहे है।आस्था की कोई थाह नही। कल्प वासी यहां गंगा तट पर लगभग एक महीना बिता कर कार्तिक पूर्णिमा के दिन पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर प्रसिद्ध बाबा हरिहरनाथ को जल अर्पित करेंगे। आस्था की गठरी लेकर पहुंचे श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में स्नान कर इहलोक के साथ परलोक भी सुधारने का जतन कर रहे हैं। इन्हीं में वे श्रद्धालु भी हैं जो आस्था की गहराई नापने की कोशिश में ठंड से कुड़कुड़ा रहे हैं।

संत-श्रद्धालुओं को अपने आंचल में समेटे गंगा मइया की थाह लगाने वालों को कोई सीमा मिल ही नहीं रही। ठंड और कोहरे में भी आस्था की रस्सी के भरोसे श्रद्धालु खिंचे चले आ रहे हैं। ठंढ के बावजूद तड़के पहर ही गंगा किनारे डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो  जाता है। पहलेजाघाट पर तमाम असुविधाओं के बाद भी लोग कैसे भक्तिभाव के साथ कल्पवास करते हैं।

क्या है कल्पवास

मुजफ्फरपुर अंचल मीनापुर के कपिलेश्वर ऋषि आश्रम रामनगर के महामंडलेश्वर राम नरेश दास बताते हैं कि पिछले 110 वर्षों से लगातार उनके मठ के लोग यहां पहुंच रहे हैं। यहां दक्षिण वाहिनी गंगा तट पर कल्पवास का खास महत्व है. कल्पवास का जिक्र वेदों और पुराणों में भी मिलता है. कल्पवास एक बहुत ही मुश्किल साधना है क्योंकि इसमें तमाम तरह के नियंत्रण और संयम का अभ्यस्त होने की जरूरत होती है. पद्म पुराण में महर्षि दत्तात्रेय ने कल्पवास के नियमों के बारे में विस्तार से बताया है. उनके अनुसार कल्पवासी को इक्कीस नियमों का पालन करना चाहिए.। महामंडलेश्वर ने बताया कि यहां बौद्धिक विकास समाज में फैली भ्रांतियां को दूर करने के लिए घाट पर प्रवचन का भी आयोजन 

किया जाता है।


घाट पर पसरा है गंदगी--

खालसा के महामंडलेश्वर राम नरेश दास के साथ अन्य कल्पवासियों ने बताया कि इस वर्ष सोनपुर मेला नहीं लगने को लेकर यहां पहलेजा घाट धाम पर भी सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। यहां के ऊपर कचरा का अंबार भरा हुआ है। पीने के पानी ,अस्थायी शौचालय ,महिलाओं के लिए कपड़ा चेंजिंग रूम के लिए भी व्यवस्था नहीं किया गया है।स्थानीय प्रशासन समय नजदीक आते ही सिर्फ खानापूर्ति करते हैं । 

ये है नियम  – सत्यवचन, अहिंसा, इन्द्रियों का शमन, सभी प्राणियों पर दयाभाव, ब्रह्मचर्य का पालन, व्यसनों का त्याग, सूर्योदय से पूर्व शैय्या-त्याग, नित्य तीन बार सुरसरि-स्न्नान, त्रिकालसंध्या, पितरों का पिण्डदान, दान, जप, सत्संग, क्षेत्र संन्यास अर्थात संकल्पित क्षेत्र के बाहर न जाना, परनिन्दा त्याग, साधु सन्यासियों की सेवा, जप एवं संकीर्तन, एक समय भोजन, भूमि शयन, अग्नि सेवन न कराना. कल्पवास में सबसे ज्यादा महत्व ब्रह्मचर्य, व्रत एवं उपवास, देव पूजन, सत्संग, दान का है.


घाट पर  पहुँचे कल्पवासी में वीरेंद्र दास, महादेव दास, झक्कास दास ,विनोद दास, ललित, किशोर सिंह ,मधुसूदन दास समेत दो दर्जन से ऊपर कल्पवासी पहुंचे हुए हैं।

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