कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी मनाई जाती है। अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है। वैसे तो हिदू धर्म में हर पर्व त्योहारों में किसी न किसी पेड़-पौधे के पूजा का विशेष महत्व है। उसी प्रकार अक्षय नवमी में आंवले के पेड़ की पूजा करने का महत्व जुड़ा हुआ। उसी को लेकर मशरक प्रखंड के विभिन्न गांवों में आंवला के पेड़ के नीचे पुजा अर्चना की गई।मान्यताओं के अनुसार अक्षय नवमी के दिन स्नान, पूजा एवं दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अक्षय नवमी दीपावली के आठ दिन बाद पड़़ता है। इस दिन आंवले के पेड़ के अलावा भगवान विष्णु की भी विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। आंवला की पूजा का है धार्मिक अवसर पर महिलाओं ने आंवले के पेड़ के नीचे दीप जलाकर विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की। इसके बाद पेड़़ के नीचे मिट्टी निर्मित चूल्हे पर प्रसाद बना अपने परिजनों, सगे-संबंधी, मित्रों वितरित किया। माना जाता है पूरे विधि-विधान से अक्षय नवमी मनाने पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है। इसे लोगों के धन-धान्य में वृद्धि होती है।