गौरव बिहार

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निशानी गांधी कुटीर आज भी अपने गौरवशाली इतिहास का गवाह बना हुआ है

 




दिघवारा (सारण)राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की निशानी गांधी कुटीर मलखाचक कि  यह गाँव स्वतंत्रता सेनानियों का कबा था, और स्वतंत्रता संग्राम के सिपाही अपनी रणनीति को यहाँ से अंजाम देते थे!  इस गाँव में आज भी गाधीं कुटीर अपने किवदंतियों का गवाह बना हुआ है! यहाँ महात्मा गांधी ने छ: माह का प्रवास किया था! यही नहीं महात्मा गांधी के अध्यात्मिक गुरु व संत गार्बो दा लगभग छ: माह तक दिघवारा प्रखंड के मलखाचक में रहकर क्रांतिकारीयों को आध्यात्मिक ज्ञान बाटां  करते थे तथा गांधी जी के सचिव रायकृष्ण दास रामविनोद सिंह के घर रहकर "सेवेन मंथ वीथ महात्मा गांधी" नामक पुस्तक लिखा! इतिहासकार डा०के के दत्ता की लिखित पुस्तक फ्रीडम मूवमेंट औफ बिहार में भी इस गाँव कि बखूबी चर्चा है! मलखाचक गाँव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, योगेन्द्र शुक्ल, बैकुंठ शुक्ल, ध्वजा प्रसाद साहू, मीराबेन, मनोरंजन बाबू, रामरक्षा ब्रहमचारी, चंद्रिका सिंह आदि क्रांतिकारीयों का प्रवास था तथा यहाँ आने वालो में डा०राजेन्द्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, रामगढ़ के राजा कामख्या नारायण सिंह, मानिक लाल मुंशी, सरदार पटेल के पुत्र डहाया लाल पटेल, कन्हैया लाल, जानकीनंद सिंह आदि प्रमुख रूप से सामिल है!

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