विवाहोपरांत मिलन का अनूठा संस्कार ही नही बल्कि पवित्रता की सुगंध कराती है हनीमून नवविवाहिता सोनपुर मेला पहुँच कर हनीमून मनाते हुए एक-दूसरे के स्वभाव, रूचियों, जरूरतो -अपेक्षाओं के विषय में पूरी तरह से जान लेना चाहिए, सोनपुर----विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला समापन के पूर्व और समापन के 15 दिन बाद भी नवविवाहित दंपतियों ने सोनपुर मेला में पहुंचकर नमामि गंगे घाटों के छल छल करती धराओं व नदियों की तेज धार को भी देखते और नौका विहार करते हुए खुलकर मेला का आंनद उठाते हुए हनीमून का आनंद ले रहे हैं। इतना ही नहीं नवविवाहिता दंपतियों ने मेले के आनंद के साथ साथ होटलों में पहुंचकर विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद भी चख रहे हैं । बता दें कि यह परंपरा विदेशों में खूब प्रचलन है । लेकिन इसका असर अब भारत के हर राज्यों में देखने को मिल रही है। विवाह के बाद हनीमून मनाने की परंपरा इन दिनों काफी बढ़ रहा है। प्रायः हर संपन्न परिवार में यह संस्कृति फल फूल रहा है । सच तो यह है कि यह परंपरा विदेशी है । आजादी के पूर्व हनीमून विदेशी दंपतियों द्वारा मनाया जाता था लेकिन आजादी के बाद यह परंपरा भारत के लोगों को भी जकड़ लिया है। साधन संपन्न तथा नौकरी चाकरी करने वाले युवक -युवतियां शादी के तुरंत बाद हनीमून मनाने के लिए दूरदराज के शहरों में जहां प्राकृतिक सौंदर्य का सम्राट स्थापित रहता है । वहां का दृश्य से ओतप्रोत रहता है वहां चले जाते हैं और खुलकर पति-पत्नी अपना वह सब आनंद उठाते हैं जो युवा अवस्था में जरूरी होता है । लेकिन इस वर्ष हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला में भी हनुमुन मनाने के लिए हजारों नवविवाहिता पहुंचे रहे हैं । वैसे हनुमुन शब्द का प्रयोग अंग्रेजी भाषा में सर्वप्रथम सन 1596 ईसवी में हुआ था। हनीमून शब्द का अर्थ है मून जो 28 दिन एक साथ बिताया गया विवाह का प्रथम मास और हनी प्यार का मिठास का प्रतीक है। उसी वक्त से हनीमून नव दंपति के लिए अवकाश का प्रतीक बन गया ताकि नवविवाहित जोड़े दैनिक तनाव से दूर रहकर वे जीवन की प्यार भरी शुरुआत कर सकें । विवाह विशेषज्ञों की राय में हनीमून के लिए जाना वैवाहिक जीवन की सुखद शुरुआत है। यह सब सोनपुर मेला में उपलब्ध है । हनीमून का अर्थ है जहां दो अनजान व्यक्ति को भावनात्मक तथा वैचारिक स्तर पर करीब लाता है वही हनीमून की मीठी यादें नव दंपति को जिंदगी भर जिम्मेदारियों से निभाने का संबंध देती है । हनीमून नवविवाहित को प्यार और आराम के ऐसे क्षण प्रदान करता है जो एक दूसरे के बीच गहरी समझ और आत्मीयता प्रदान करते हैं । हनीमून ऐसा होना चाहिए कि नवयुवक एक दूसरे के प्रति पूरी तरह समर्पित हो । हरिहर क्षेत्र मेले में हनीमून मनाने वाले इस वर्ष दिल खोलकर आ रहे हैं। एक प्रकार से हनीमून सुनियोचित एकांतवास है नवविवाहिता को इस दौरान एक-दूसरे के स्वभाव, रूचियों, जरूरतो -अपेक्षाओं के विषय में पूरी तरह से जान लेना चाहिए, क्योंकि यही सुखी वैवाहिक जीवन की नींव पड़ती है । हनीमून के दौरान ही पत्नी को पति से ससुराल के सदस्यों के स्वभाव व घरों की जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए ताकि समाज और परिवार में सामंजस्य बैठाने में परेशानी उत्पन्न नहीं हो। सचमुच यह विवाहोपरांत मिलन का अनूठा संस्कार है। इस संस्कार में पवित्रता की सुगंध डालने की जरूरत है ।