गौरव बिहार

ग्यासपुर के साहिब दरबार मे शुरू हुआ पांच दिवसीय ज्ञानामृत कथा

ग्यासपुर के साहिब दरबार मे शुरू हुआ पांच दिवसीय ज्ञानामृत कथा जिसे प्रेम की कभी अनुभूति नहीं आई उसे नारायण की अनुभूति होना मुश्किल है ।यह बातें प्रखंड के ग्यासपुर में चल रहे ज्ञानामृत कथा आयोजन के प्रथम दिन बाल व्यास पंडित अनुराग कृष्ण शास्त्री ने अपने प्रवचन में कही। साहिब दरबार द्वारा पंच दिवसीय ज्ञानामृत कथा का आयोजन किया गया है जिसमें दूर-दूर से आए हुए संतो द्वारा उपदेशों के माध्यम से लोगों को सत्कर्म करने को प्रेरित किया जा रहा है। कथा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में एक दूसरे के प्रति आदर और सम्मान का भाव तथा समाज के सभी वर्गों में एक दूसरे से प्रेम हो को लेकर किया जा रहा है। इस संबंध में साहिब दरबार के पीठाधीपति पूज्य सरकार ने कहा कि मानव धर्म हमें संसार में परस्पर प्रेम, सहानुभूति और एक-दूसरे के प्रति सम्मान करना सिखाकर श्रेष्ठ आदर्शों की ओर ले जाता है। मानव धर्म उस स्वच्छ व्यवहार को माना गया है जिसका अनुसरण करके सभी को प्रसन्नता और शांति प्राप्त हो सके।
दूसरों की भावनाओं को न समझना और उनके साथ छल-कपट करना मानव धर्म नहीं है। यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछा था कि लोक में श्रेष्ठ धर्म क्या है तो युधिष्ठिर ने यही कहा कि दया ही श्रेष्ठ धर्म है। दूसरों पर दया करना और अपने मन, वचन और कर्म से प्राणिमात्र का हित करना ही मनुष्य का कर्तव्य है और धर्म भी। जब तक मनुष्य में दूसरों के लिए दया भाव जाग्रत नहीं होगा तब तक उसमें सेवा भाव का होना भी असंभव है।

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