गौरव बिहार

सिवान जिले के प्रखंड की छोटी बड़ी खबरें

 सिसवन सिवान। सिसवन के 66 बूथ घोषित किये गए है अति संवेदनशील 25 मई को होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारी लगभग  पूरी  कर ली गई है।यंहा कुल सिसवन के कुल 117 बूथ बनाये गए है जिसमे  एक सहायक बूथ व एक चलंत बूथ है।66 बूथों को अति संवेदनशील  घोषित किया गया है ।



सिसवन सिवान। सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव के आपसी विवाद को लेकर हुई मारपीट में एक महिला घायल हो गई।घायल महिला की पहचान ग्यासपुर गाँव निवासी श्रीराम यादव की पत्नी रीता देवी हैं। घायल का इलाज सिसवन रेफरल अस्पताल में कराया गया। पीड़ित ने बताया कि पुलिस को मामले की जानकारी दी गई है।




सिसवन सिवान।सिसवन थाना क्षेत्र के  घुरघाट गांव में आपसी विवाद में हुई मारपीट की घटना में मां बेटी घायल हो गई। घायलों में घूरघाट गाँव निवासी बलभद्र यादव की पत्नी हीरामती देवी व उसकी विवाहिता पुत्री किशुनबारी गांव के वीर बहादुर यादव की पत्नी फूल कुमारी है। सभी घायलों को सिसवन की रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पर डॉक्टरों द्वारा मरहम पट्टी की गई।




सिसवन सिवान। सिसवन थाना क्षेत्र के सीवान सिसवन मुख्य मार्ग पर बाइक की दुर्घटना में तीन लोग घायल हो गए। घायलों में रामपुर गांव के रामेश्वर शाह का पुत्र लच्छन देव साह गंगपुर सिसवन के दिलीप साह की पत्नी अंजू देवी व उसकी सात बर्षीय पुत्री सलोनी कुमारी शामिल है। घायलो का इलाज सिसवन रेफरल अस्पताल में कराया गया।


हसनपुरा सिवान।हसनपुरा प्रखंड में कृषि विभाग द्वारा हरी खाद योजना के तहत प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में ढैंचा बीज का वितरण किया जा रहा है। जहां ऑनलाइन आवेदन के आधार पर ही प्रत्येक किसान को अनुदानित दर 105 रुपये में एक पैकेट 8 किलो बीज का वितरण किया जा रहा है। जहां अभी तक हसनपुरा प्रखंड अंतर्गत 3 क्विंटल बीज वितरण किया जा चुका है। इस संबंध में प्रभारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी रामकिशोर शर्मा ने बताया कि क्षेत्र के लिए 30 क्विंटल बीज प्राप्त हुआ है। जहां संबंधित किसानों के बीच बीज का वितरण किया जा रहा है। वही उन्होंने बताया कि प्रत्येक पंचायतों में 2-2 क्विंटल बीज वितरण करने का लक्ष्य प्राप्त है। आगे बताया कि कृषि योग्य खेतों में किसानों को खाद डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। भूमि में जीवांश पदार्थ एवं पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती है। पोषक तत्वों का निछालन कम से कम होता है। साथ ही पोषक तत्वों के संग्रहण की क्षमता बढ़ जाती है। भूमि की जल धारण, संचयन एवं वायु संचार क्षमता में वृद्धि होती है। भूमि में कार्य करने वाले लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता में भी बढ़ोत्तरी होती है।

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