नगर पंचायत के चुनाव के प्रथम दिन एक भी नामांकन नहीं किए अभियार्थी

सोनपुर-- राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा निदेश अनुसार सोनपुर अनुमंडल कार्यालय के सभागार में अलग-अलग नामांकन के लिए काउंटर बनाए गए हैं । जिसमें सोनपुर नगर पंचायत के अनुमंडल सभागार तथा दिघवारा नगर पंचायत के डीसीएलआर कार्यालय प्रकोष्ठ में नामांकन कार्य होगा । इस बात के जानकारी देते हुए सोनपुर अनुमंडल पदाधिकारी सह निर्वाची पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि नामांकन के प्रथम दिन शनिवार को सोनपुर नगर पंचायत के कुल 21 वार्डों से नामांकन करने वाले प्रथम दिन शनिवार की एक भी अभियार्थी नामांकन दाख़िल नही किया है।अवर निर्वाची पदाधिकारी सोनपुर अखलाख अंसारी ने शनिवार को बताया कि कुल 20 अभ्यर्थियों ने नॉमिनेशन फॉर्म खरीदा इसमें 1 मुख्य पार्षद 19 वार्ड पार्षद के पद के लिए एनआर सीट कटाये जिसमे महिला तथा पुरुष शामिल है । वही दिघवारा नगर पंचायत के निर्वाची पदाधिकारी सह भूमि सुधार उप समाहर्ता सोनपुर अखिलेश कुमार ने बताया कि नामांकन के प्रथम दिन एक भी उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया है । दिघवारा में कुल 18 वार्ड है इसके लिए प्रथम दिन कुल 13 अभ्यर्थियों ने एआर रसीद कटाये है ।
सोनपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का पद सुरक्षित कर दिए जाने के कारण सामान्य जाति से चुनने लड़ने वाले योग्य उम्मीदवारों का मन विचलित हो गया है तथा तमाम मतदाताओं ने इस व्यवस्था की निंदा करते हुए कहा कि राज्य सरकार एवं चुनाव आयोग के द्वारा सोची समझी साजिश के तहत सामान्य जाति के लोगों को हर तरह से पड़तारित किया जा रहा है जो किसी भी दृष्टिकोण से न्याय उचित नहीं प्रतीत नही होता है । पिछले चुनाव से ही मुख्य पार्षद का रिजर्व था इस बार उप पार्षद का पद भी विशेष जाति के महिला के लिए सुरक्षित कर दिया गया है । चुनाव में आरक्षण योग्यता के अनुसार होती तो काफी विकास की संभावना होती लेकिन जैसे ही चुनाव महिला या आरक्षण कोटि से प्राप्त पद का सही इस्तेमाल अनुभव नहीं रहने के कारण विकास में कई रुकावट आ रही है। ऐसे में राज्य और केंद्र की सरकार इस लचर व्यवस्था को ठीक करें जिससे राज्य और देश का विकास हो सके। बिहार में महिला आरक्षण के कारण महिलाएं पद पर आसीन तो हो जाती है लेकिन अधिकतर महिलाएं अनुभवी नहीं रहने के कारण उनके पुत्र ,पति या सगे संबंधित कार्य को करते हैं और वह सिर्फ रबर स्टांप के रूप में उनकी पहचान होती है । उन्हें अपने पद पर उनके क्या कार्य व अधिकार है उन्हें यह भी ज्ञात नहीं होती है । अब देखना यह होगा कि नगर पंचायत के चुनाव में निर्वाचित होने के बाद महिलाएं कितना विकास आरक्षण का लाभ उठाकर करती है ।
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