बाबा हरी और हर का कभी होता था माल्यागिरी चंदन से लेप

सोनपुर ----बाबा हरिहर नाथ की प्रतिमा एक ही साथ संयुक्त रूप से जैसा सोनपुर के मंदिर में है शायद भारतवर्ष के किसी भी अन्य मंदिर में नहीं है यहां हरि और हर एक साथ एक ही काले पत्थर में है जो शिवलिंग के रूप में दिखाई पड़ता है इसी पर जलाभिषेक किया जाता है। बेलपत्र चढ़ाया जाता है धूप बत्ती दिखलाया जाता है चंदन का लेप चढ़ाया जाता है । कहते हैं कि बहुत पुराने जमाने से बाबा हरी और हर माल्यागिरी चंदन का लेप लगाने प्रवधान चलता आ रहा है जो कमोवेश आज भी कायम है । चंदन काफी खुशबुदार और दवातुल्य माना जाता है।
बुजुर्ग ब्राह्मणों के अनुसार नेपाल के हिमालय पर्वत ,कर्नाटक, उत्तराखंड आदि जगहों से मलयागिरी चंदन की लकड़ी भक्तगण मंगवा कर मंदिर को दान करते थे वैसे पटना के मारूफगंज से भी मालियागिरी चंदन लाया जाता था । मंदिर प्रांगण में उसे घसने के लिए पत्थर का बना हुआ एक टुकड़ा रखा रहता था बाघ बच्चा बाबू के परोशी अमरेंद्र नरायण सिंह भी मलयागिरी चंदन लाकर मंदिर को दान करते थे । पहले बाबा हरिहर नाथ के मलयागिरी चंदन और बेलपत्र से श्रृंगारित किया जाता था जो काफी आकर्षक होता था उसके दूसरे दिन सुबह जब चंदन का लेप हटाया जाता था तो उसे ग्रहण करने वाले की भीड़ लग जाती थी उस समय चंदन घसने वाला पत्थर लेकर कई ब्राह्मण मंदिर के गेट पर बैठे रहते थे उसके लिए स्व वाचस्पति द्विवेदी काफी फेमस है उन्हीं के पुत्र रमेश द्विवेदी है जो श्रृंगारी बाबा कहलाते हैं । पहले जब मलयागिरी चंदन का प्रयोग होता था तब चंदन की खुशबू से मंदिर प्रांगण खुशबूदार हो जाता था अब मलयागिरी चंदन का लकड़ी नहीं आता है लेकिन सुगंधित चंदन से आज भी बाबा हरिहर नाथ का श्रृंगार किया जाता है वैसे विभिन्न प्रकार के पुष्प माला आदि तो बाबा पर प्रतिदिन चढ़ता ही है इसके पूर्व हरिहरनाथ को 108 घर के जल से स्नान कराया जाता था घरा तांबा या पीतल का हुआ करता था यहां गंगा गंडक के संगम से जल लाया जाता था आज भी बाबा का स्नान विधि विधान के साथ नित रोज कराया जाता है । इन पर लगाए गए मलयागिरी चंदन का स्पर्श करने के लिए भक्तगण लालायित रहते हैं ।
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